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Tuesday, 29 May 2012
Wednesday, 23 May 2012
गूँज
दो अजनबी खड़ें हैं,
एक शमा की जाल में
धीरे - धीरे घुल रहें हैं,
टूटे बिखरे कांच पे
हलके से आगे बढ रहें हैं ।
उस शमा की आंच से,
ज़रा ज़रा सा लड़ रहें हैं ।
प्यालों की गूँज में जो ये
धीमे से बातें हो रहीं हैं,
साकी पहचाना, जान कर,
नई शुरुआतें हो रहीं हैं ।
दो अजनबी रात भर यूहीं,
खोते गए भूली बातों में,
राहें कभी मिली नहीं,
अब मिलतें हैं अक्सर खवाबों में ।
Friday, 13 April 2012
Wednesday, 11 April 2012
Tuesday, 10 April 2012
खामोशी
मैं और मेरी खामोशी,
काफी पुराने दोस्त हैं,
आम सी दोस्ती है
मिलतें हैं, झगड़तें हैं,
कभी कभी हिचकिचाकर,
चुपके से बातें करतें हैं,
कभी चिल्लाकर,
रातों में गुस्सा करतें हैं,
कभी संग यूं उड़ते हैं,
कि भीड़ों से उभर जाएं,
कभी ऐसे बिखरतें हैं,
जानी गलियों में भटक जाएं ।
पर साथ हो जब आपका,
वो मुझसे कुछ खफा रहती थी।
हर बार इसी मोड़ पर,
मुझसे वो अलविदा कहती थी।
आज इसी मोड़ पर,
अजूबी सी बात हुई,
आखिर डर-डर कर,
आप दोनों की मुलाकात हुई,
अब कभी कभी हमारे बीच,
ख़ामोशी आकर रहती है ।
लम्बे दिनों की लम्बी शामों में ,
लम्बे दिनों की लम्बी शामों में ,
हमें चुप्पी की चादर से ढकती है ।
Friday, 30 March 2012
Thursday, 29 March 2012
Wednesday, 28 March 2012
Tuesday, 27 March 2012
गर्मी
इस साल गर्मी कुछ ज्यादा है,
घर में रहने का इरादा है,
ठंडी हवाएं, पुरानी किताबें,
इनसे भी ख़ुशी कोई ज्यादा है?
अब निकलेंगे बारिश में,
कुछ नमी की ख्वाहिश में,
तब तक काली स्याही से,
शब्दों को रंगने का इरादा है,
इस साल गर्मी कुछ ज्यादा है ।
बंद दरवाजें हैं तो आहटें नहीं हैं ।
भूली हुई चाहतें नहीं हैं ।
इस बार अकेले रहने का वादा है,
इस साल गर्मी कुछ ज्यादा है ।
Friday, 24 February 2012
मुलाकात
अन्सोई रातों से,
अनकही बातों से,
उलझे बालों से,
गीले गालों से,
जाने कितने सालों से,
अकेले बैठें हैं,
गुमसुम यूं ऐठें हैं,
कबसे थमी नज़र,
पर न कोई खबर.
भीगे से ख़त से,
सूनी सी छत से,
दबी सी आशा हैं ,
नैनों की भाषा हैं ,
कबसे तलाशा हैं..
तुम यूं न खोते तो,
तन्हा न होते तो,
सावन बरसता,
दिन फिर सँवरता,
चंदा निखरता .|
Thursday, 23 February 2012
The Rickety Rack
A blog that covers a range of subjects from poetry to tech; from movies and photography to science; with a special interest for Mumbai, India.
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