उस ओर
बंद डब्बों में क्या पड़ा है,
कौन जानता है,
उस ओर कौन खड़ा है,
कौन जानता है ।
क्या पता हम सहीं हैं
या हैं गलत |
क्या पता आगे गली है
या है सरहद |
धड़कन है इन शब्दोँ में
कि वो भी लापता हैं,
या इन चुप रातों में,
वो भी खुशनुमा हैं |
बस ज़िन्दगी समेट
ये बंदा आगे बढा है,
क्या पता उस ओर
कौन खड़ा है |
No comments:
Post a Comment